मक़बूल भट के कथन
मक़बूल भट के कथन, उनके लेखन और बयानों से। उन्होंने ये बातें उर्दू में कहीं और लिखीं; यहाँ उनका हिंदी अनुवाद है।
स्वीकारोक्ति“मेरा एकमात्र जुर्म यह है कि मैंने रूढ़िवाद, अज्ञान, लालच, शोषण, ग़ुलामी, भाई-भतीजावाद और पाखंड की ताक़तों के ख़िलाफ़ बग़ावत की है।”
हमें समर्थन चाहिए, ग़ुलामी नहीं“हम अपने दोस्तों के समर्थन का स्वागत करेंगे, लेकिन आपसी दोस्ती और सम्मान के आधार पर, नियंत्रण और श्रेष्ठता के आधार पर नहीं।”
आज़ादी का मतलब क्या है?“आज़ादी से हमारा मतलब सिर्फ़ कश्मीर की धरती से विदेशी क़ब्ज़े का अंत नहीं है, बल्कि हम चाहते हैं कि हमारे लोग ग़रीबी, पिछड़ेपन, अज्ञान, बीमारियों, अन्याय और आर्थिक व सामाजिक असमानताओं की ताक़तों से भी आज़ाद हों। एक दिन हम वह आज़ादी हासिल करेंगे।”
अपने मन को आज़ाद करो“अपने मन को ग़ुलामी के विचारों से आज़ाद करो और क़बीलापरस्ती की ज़ंजीरें तोड़ दो। क़बीलों के भ्रम से बाहर निकलो और अपनी मातृभूमि कश्मीर में आज़ादी, स्वतंत्रता और सम्मान के लिए ख़ुद को तैयार करो।”
कश्मीरी हर जगह आवाज़ उठाएँ“हमें अपने आज़ादी के संघर्ष को ऐसी बुनियाद पर खड़ा करना है कि हमारी आवाज़ क़ब्ज़ा करने वालों के सत्ता-केंद्रों में गूँजे और पूरी दुनिया आज़ादी के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की गवाह बने।”
आज़ादी के दीपों का उत्सव“मेरे लिए इससे बड़ी ख़ुशी की बात क्या हो सकती है कि ज़ुल्म और दमन न केवल उम्मीद के उन दीयों को बुझाने में नाकाम रहे जो हमने अपने ख़ून से जलाए, बल्कि उनसे और भी कई दीये जल उठे। अगर यह सिलसिला जारी रहा तो वह दिन दूर नहीं जब पूरा देश रोशन हो जाएगा, और तब हम इसे सही मायनों में आज़ादी के दीपों का उत्सव कहेंगे।”
जो हम करते हैं, वही मायने रखता है“संघर्ष वह मैदान है जहाँ न केवल साथी और विरोधी, बल्कि पाखंडी भी बेनक़ाब हो जाते हैं।”
सचेत जीवन“सच को पाने और उसे आगे बढ़ाने का दावा करने वालों के लिए सबसे अच्छा जीवन यह है कि वे सच्ची चेतना हासिल करें और उस चेतना की रोशनी में व्यक्तिगत और सामूहिक जीवन को बेहतर बनाएँ।”
पहचान“किसी देश की राष्ट्रीय पहचान के निर्माण में कई कारक योगदान देते हैं। यह न किसी के केवल दावा करने से बनती है और न किसी के छोड़ देने से मिट जाती है। राष्ट्रीय पहचान का निर्माण प्रकृति की देन है, और एक बार बन जाने के बाद धरती की कोई ताक़त उसे मिटा नहीं सकती। इसलिए हमारे लिए राष्ट्रीय पहचान छोड़ने और अपने देश के बँटवारे का विचार भी एक बड़े गुनाह जैसा है।”
शांति“दुनिया में कौन शांति और स्थिरता नहीं चाहेगा? लेकिन क़ब्रिस्तान की शांति और शांति से बहते जीवन व समाज की शांति में फ़र्क़ करना ज़रूरी है। जो शांति डर और आतंक के साये में हासिल की जाए, और जिसके लिए हमें अपनी आकांक्षाओं को दबाना और अपने मन को दूषित करना पड़े, वह शांति नहीं बल्कि मौत का फ़रमान है।”
आख़िरी ख़्वाहिश“अपनी आख़िरी ख़्वाहिश के तौर पर मैं अपने उन सभी दोस्तों से, जो मेरे विचार साझा करते हैं, कहना चाहूँगा कि वे डटे रहें और साझा मक़सद के लिए संघर्ष जारी रखें, हालात चाहे कितने ही कठिन क्यों न हो जाएँ। मुझे पूरा यक़ीन है कि एक दिन हम आज़ादी हासिल करेंगे।”
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