11 फ़रवरी अभियान सामग्री

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11 फ़रवरी : आपको जो कुछ चाहिए

मक़बूल भट दिवस के लिए पोस्टर, सोशल मीडिया तस्वीरें, तथ्य और फ़ोटो, हर उस व्यक्ति के लिए मुफ़्त जो स्मृति-सभा आयोजित करे, उनके बारे में लिखे या उनकी कहानी साझा करे। हिंदी, उर्दू और अंग्रेज़ी में।

–दिन बाक़ी

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संक्षिप्त परिचय

मक़बूल भट (18 फ़रवरी 1938 – 11 फ़रवरी 1984), जिन्हें शहीद-ए-कश्मीर के नाम से याद किया जाता है, एक कश्मीरी राजनीतिक नेता थे जिन्होंने एक आज़ाद, स्वतंत्र और लोकतांत्रिक जम्मू-कश्मीर और ग़रीबी, अज्ञान और अन्याय से मुक्त समाज के लिए संघर्ष किया। उन्हें 11 फ़रवरी 1984 को तिहाड़ जेल, नई दिल्ली में फाँसी दी गई और जेल के अंदर ही दफ़ना दिया गया। उनके अवशेष आज तक उनके परिवार को नहीं लौटाए गए।

मुख्य तारीख़ें

  • 18 फ़रवरी 1938: कुपवाड़ा ज़िले के त्रेहगाम में जन्म
  • 1958: श्रीनगर में बी.ए. के बाद पाकिस्तान गए और पेशावर में पत्रकार के रूप में काम किया
  • 1966: वापसी, गिरफ़्तारी और मौत की सज़ा
  • 1968: श्रीनगर की जेल से फ़रार; मार्च 1969 तक मुज़फ़्फ़राबाद में हिरासत में
  • 1971: गंगा अपहरण के बाद फिर गिरफ़्तारी और पाकिस्तान की विशेष अदालत में मुक़दमा
  • 1976: मई में फिर रेखा पार की और कुछ ही दिनों में गिरफ़्तार
  • 1978: मौत की सज़ा बहाल; तिहाड़ जेल भेजे गए
  • 11 फ़रवरी 1984: तिहाड़ जेल में फाँसी और जेल के अंदर दफ़न

माँग

मक़बूल भट के अवशेष तिहाड़ जेल से कश्मीर लौटाए जाएँ, उस क़ब्र में दफ़नाने के लिए जो 1984 से शहीदों के क़ब्रिस्तान, ईदगाह, श्रीनगर में उनका इंतज़ार कर रही है। उनकी माँ शाहमाली बेगम ने तीन दशकों तक इसके लिए संघर्ष किया।

उनके शब्दों में

“आज़ादी से हमारा मतलब सिर्फ़ कश्मीर की धरती से विदेशी क़ब्ज़े का अंत नहीं है, बल्कि हम चाहते हैं कि हमारे लोग ग़रीबी, पिछड़ेपन, अज्ञान, बीमारियों, अन्याय और आर्थिक व सामाजिक असमानताओं की ताक़तों से भी आज़ाद हों।”

– मक़बूल भट (अंग्रेज़ी से अनुवाद)

हैशटैग

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