मक़बूल भट फ़ाउंडेशन का परिचय: उद्देश्य और लक्ष्य
उनकी याद, उनका रिकॉर्ड और उनके विचार ज़िंदा रखना
मक़बूल भट फ़ाउंडेशन (MBF) कश्मीर रिकॉर्ड एंड रिसर्च काउंसिल (KRRC) की एक परियोजना है। इसका उद्देश्य शहीद-ए-कश्मीर मक़बूल भट (18 फ़रवरी 1938 – 11 फ़रवरी 1984) के जीवन, उनके शब्दों और उनकी विरासत को सुरक्षित रखना और उन्हें हर किसी तक मुफ़्त और सही रूप में पहुँचाना है।
मक़बूल भट ने कश्मीर की आज़ादी और ग़रीबी, अज्ञान और अन्याय से मुक्त समाज के लिए अपनी जान दी। फ़ाउंडेशन शोध, प्रकाशन और शांतिपूर्ण जन-अभियान के ज़रिए इस विरासत को आगे बढ़ाता है।
“अपनी आख़िरी ख़्वाहिश के तौर पर मैं अपने उन सभी दोस्तों से, जो मेरे विचार साझा करते हैं, कहना चाहूँगा कि वे डटे रहें और साझा मक़सद के लिए संघर्ष जारी रखें, हालात चाहे कितने ही कठिन क्यों न हो जाएँ।”
मक़बूल भट, उनकी आख़िरी ख़्वाहिश (अंग्रेज़ी से अनुवाद)
हम कौन हैं
हम शोधकर्ता, लेखक, कार्यकर्ता और कश्मीरी परिवार हैं, कश्मीर को बाँटने वाली रेखा के दोनों ओर और प्रवास में, जो मानते हैं कि उनकी कहानी लोगों की है। दशकों तक यह कहानी मुख्य रूप से अदालती फ़ाइलों, जेल के रिकॉर्ड और दो देशों के अख़बारों के ज़रिए कही गई। फ़ाउंडेशन वह सब इकट्ठा करता है जो उन्होंने लिखा और कहा, और जो उन्हें जानने वालों को याद है, ताकि रिकॉर्ड ख़ुद बोले।
उद्देश्य और लक्ष्य
- रिकॉर्ड सुरक्षित रखनाउनके पत्र, बयान, अदालती दस्तावेज़, तस्वीरें, ऑडियो और वीडियो खो जाने से पहले इकट्ठा करना, डिजिटल बनाना और सुरक्षित रखना।
- उनका जीवन सच्चाई से बतानाउनके जीवन और संघर्ष पर प्रामाणिक स्रोतों वाली जीवनी और शोध प्रकाशित करना, और सबूतों के साथ ग़लतफ़हमियों व ग़लत चित्रण को सुधारना।
- उन्हें घर लानातिहाड़ जेल से उनके पार्थिव अवशेषों की कश्मीर वापसी के लिए शांतिपूर्ण अभियान, उस क़ब्र तक जो शहीदों के क़ब्रिस्तान, ईदगाह, श्रीनगर में उनका इंतज़ार कर रही है।
- 11 फ़रवरी को ज़िंदा रखनाकश्मीर और दुनिया भर में हर साल शहादत दिवस के आयोजनों का दस्तावेज़ीकरण करना और उन्हें आपस में जोड़ना।
- उनके विचारों को आगे बढ़ानाआज़ादी की उनकी परिभाषा को बढ़ावा देना: केवल विदेशी शासन से नहीं, बल्कि ग़रीबी, अज्ञान, अन्याय और असमानता से भी मुक्ति।
- नई पीढ़ियों को जागरूक करनाछात्रों, शोधकर्ताओं और पत्रकारों के लिए अंग्रेज़ी, उर्दू, हिंदी और क्षेत्र की अन्य भाषाओं में मुफ़्त सामग्री, ई-बुक्स और अनुवाद उपलब्ध कराना।
- शांति के पुल बनानादक्षिण एशिया के लोगों के बीच “आपसी दोस्ती और सम्मान” के आधार पर संवाद और दोस्ती को बढ़ावा देना, और ऐसी शांति जो “क़ब्रिस्तान की शांति” न हो।
- खुले ढंग से काम करनाहर स्रोत का श्रेय देना, योगदान और सुधारों का स्वागत करना, और संग्रह को सबके लिए मुफ़्त रखना।
वे अब भी घर नहीं लौटे
मक़बूल भट को 11 फ़रवरी 1984 को तिहाड़ जेल में फाँसी दी गई और जेल के अंदर ही दफ़ना दिया गया। उनके परिवार को सूचना नहीं दी गई, और उनका शव आज तक लौटाया नहीं गया।
2012 में फ़ाउंडेशन ने भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश, जम्मू-कश्मीर के दोनों हिस्सों के नेताओं और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव से याचिका की कि उनके अवशेष कश्मीर में दफ़नाने के लिए लौटाए जाएँ।
हम कैसे काम करते हैं
संग्रह देखें
काम में जुड़ें
फ़ाउंडेशन उन लोगों से बढ़ता है जो अपने पास की चीज़ें साझा करते हैं। आप ये भेजकर मदद कर सकते हैं:
- मक़बूल भट के बारे में तस्वीरें, वीडियो और दस्तावेज़
- आपके इलाक़े में 11 फ़रवरी के आयोजनों की रिपोर्टें और तस्वीरें
- उन्हें जानने वालों की यादें, और इस साइट पर किसी भी चीज़ में सुधार
- अपनी भाषा में अनुवाद
मक़बूल भट फ़ाउंडेशन · कश्मीर रिकॉर्ड एंड रिसर्च काउंसिल (KRRC) की परियोजना · 2011 से ऑनलाइन

